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४०० |
अभिमान नाही संपत्तीचा, गर्व नाही रूपाचा |
| -------रावांना घास घालते वरण भात तुपाचा |
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४०१ |
यमुना जलावर पडली ताजमहालाची सावली |
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------- रावांची जन्मदाती, धन्यती माऊली |
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४०२ |
श्रीक्रुष्णाच्या मस्तकावर सदैव असतो शेष |
| ------- रावांचे नाव घेऊन करते मी
ग्रुहप्रवेश |
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४०३ |
शंकराची पुजा पार्वती करते खाली वाकून |
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------- रावांचे नाव घेते सर्वाचा मान राखून |
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४०४ |
ताजमहल बांधायला कारागीर होते कुशल |
| ------- रावांचे नाव घेते तुमच्यासाठी
स्पेशल |
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४०५ |
पतिव्रतेचे व्रत घेऊन नम्रपणे वागते |
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------- रावांचे नाव घेताना आशिर्वाद मागते |
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४०६ |
अंगणात व्रुदांवन, व्रुदांवनात तुळस |
| ------- रावांचे नाव घेताना कसला हो आळस |
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४०७ |
संसाररुपी वेलीचा गगनात केला झुला |
| ------- रावांचे नाव घेते आशिर्वाद दयावा
मला |
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४०८ |
मोह नाही, माया नाही, नाही मत्सर हेवा |
| ------- रावांचे नाव घेते नीट लक्ष ठेवा |
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४०९ |
कपाळावर कुंकु, हिरवा चुडा हाती |
| ------- राव माझे पती सांगा माझे भाग्य
किती |
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४१० |
सनई आणि चौघडा वाजे सप्तसूरात |
| ------- रावांचे नाव घेते ------ च्या
घरात |
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४११ |
मंदीराचे वैभव परमेश्वराची मुर्ती |
| ------- रावांचे नाव घेऊन करते इच्छापुर्ती |
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४१२ |
पंचपक्वांनाच्या ताटात वाढले लाडू पेढे |
| ------- रावांचे नाव घेताना कशाला आढे वेढे |
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४१३ |
मला नाही काही येत मी आहे साधी |
| ------- रावांचे नाव घेते सर्वाआधी |
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४१४ |
रातराणीचा सुगंध त्यात मंद वारा |
| ------- रावांच्या नावाचा भरला हिरवा चुडा |
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४१५ |
कपाळाचं कुंकु जसा चांदण्याचा ठसा |
| ------- रावांचे नाव घेते सारेजण बसा |
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४१६ |
माहेर तसं सासर नाते संबंधही जुने |
| ------- राव आहेत सोबत मग मला कशाचे उणे |
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४१७ |
गोकुळासारखं सासर सारे कसे हौशी |
| ------- रावांचे नाव घेते ------- दिवशी |
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४१८ |
छ्न छन बांगडया, छूम छूम पैंजण |
| ------- रावांचे नाव घेते ऐका सारेजण |
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४१९ |
ह्र्दयाच्या भावनांना प्रितीचा फुलोरा |
| ------- रावांच्या सह फुलो सौख्याचा
फुलोरा |