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६२० |
पंढरपुरच्या यात्रेत
हरीनामाचा गजर |
| ------- रावांचे नाव
ऐकण्यासाठी सर्वजण हजर |
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६२१ |
श्रीक्रुष्णाच्या
गळयामध्ये वैजयंतीमाला |
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------- रावांचे नाव
घेते मंगल दिन आला |
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६२२ |
आरक्त गालावर उमटले
लज्जेचे भाव |
| ------- रावांनी घेतला
माझ्या अंतःकरणाचा ठाव |
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६२३ |
सकाळच्या वेळी बागेत फुल तोडतो माळी |
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------- रावांचे नाव घेते आता
तुमच्यावर आली पाळी |
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६२४ |
यमुनेच्या तीरावर
ताजमहालाची इमारत |
| ------- रावांचे नाव
घेण्यास नाही मी हरत |
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६२५ |
महादेवाच्या पुढे असतो नंदी |
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------- रावांचे नाव घेऊन देते
तुम्हांला संधी |
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६२६ |
पहाटेच्या वेळी वारा
वाहतो झुळझुळ |
| ------- रावांचे नाव
घेताना पैजंण वाजतात खुळ्खुळ |
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६२७ |
चांदीच्या तांब्याला
नागाची खुण |
| ------- रावांचे नाव
घेते ------- रावांची सून |
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६२८ |
हिरवी बांगडी गुलाब
दास |
| ------- रावांच्या
ताटापूढे अत्तराचा वास |
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६२९ |
लाज-या राधिकेला
कन्हैया म्हणतो हास |
| ------- रावांना घालते
लाडवाचा घास |
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६३० |
वसंत ऋतुत कोकीळा करते
कुंजन |
| ------- रावांच्या
बरोबर करते लक्ष्मीपुजन |
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६३१ |
चंद्राभोवती तारकांनी
धरले गोल अंगण |
| ------- रावांच्या
नावाने बांधले मी कंकण |
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६३२ |
जमीन दुभंगुन सीता झाली
गुप्त |
| ------- रावांनी हार
घालुन आईवडिलांना केले मुक्त |
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६३३ |
अम्रुत मुर्तीला
स्वरुप देतो कलाकार |
| ------- रावांचे सदगुण
हेच माझे अलंकार |
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६३४ |
हळद लावते किंचीत कुंकु
लावते ठसठशीत |
| ------- रावांसारखे पती
मिळाले हेच माझे पूर्व संचित |
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६३५ |
सीतेच्या पर्णकुटीत
लावल्या केळी |
| ------- रावांचे नाव
घेते पुजेच्या वेळी |
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६३६ |
मेघरुपी पिंपातून टपटप
पडतात मोती |
| ------ रावांसारखे पती
मिळाले देवाचे आभार मानू किती |
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६३७ |
रुसलेल्या राधेला
क्रुष्ण म्हणतो हास |
| ------- रावांचे नाव
घेते तुमच्यासाठी खास |
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६३८ |
संसाररुपी देवळात
नंदादीप तेजावा समाधानाचा |
| ------- रावांच्या
पाठीशी आशिर्वाद असावा तुमचा |
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६३९ |
यमुनेच्या डोहात
क्रुष्णा वाजवी पावा |
| ------- रावांच्या
जीवावर संसार सुखाचा व्हावा |