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६४० |
आशिर्वादाची फुले वेचते
वाकुन |
| ------- रावांचे नाव
घेते आपला मान राखून |
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६४१ |
दत्तात्रयाचा अवतार
ब्रम्हा, विष्णू, महेश्वर |
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------- रावांशी जुळले
जीवनावे स्वर |
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६४२ |
दया, क्षमा, शांती हेच
सतीचे माहेर |
| ------- रावांच्या
चरणावर केला पंचप्राणांचा आहेर |
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६४३ |
गौतमाची गौतमी, वसिष्ठांची अरुंधती |
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------- रावांची मी सौभाग्यवती |
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६४४ |
ह्रदयरुपी शिंपल्यात
प्रितीचे पाणी |
| ------- रावांच्या
नावाने बांधले मंगळमणी |
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६४५ |
मंगळसुत्र हा सौभाग्याचा अलंकार |
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------- रावांच्यासह ध्येय आशा होवोत
साकार |
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६४६ |
मंगळसुत्राच्या वाटीत
संगम सासर माहेरचा |
| ------- रावांचे नाव
घेऊन मान राखते सर्वांचा |
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६४७ |
देवीच्या देवळात भोपी
खेळतो पोत |
| ------- रावांनी बांधली
माझ्या गळयात मंगळसुत्राची पोत |
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६४८ |
मंगळसुत्र हेच बायकांचे
लेणे |
| ------- रावांकरिता
स्विकारले ------- घराणे |
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६४९ |
अलंकारात अलंकार
श्रेष्ठ मंगळसुत्र |
| ------- रावांच्या हाती
माझे जीवनसुत्र |
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६५० |
शिवाजीसारखा राजा
गादीवर बसावा |
| ------- रावांचे नाव
घेते आशिर्वाद असावा |
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६५१ |
भाऊबीजेच्या दिवशी
भाऊरायाला ओवाळीन |
| ------- रावांचे नाव
घेते --------- ची बहिण |
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६५२ |
अत्तरदाणी गुलाबदाणी
विडे ठेवले करुन |
| ------- रावांना माळ
घातली कुलदेवतेला स्मरुन |
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६५३ |
सौभाग्यवतीचा अलंकार
म्हणजे काचेचे चूडे |
| ------- रावांचे नाव
घेते मंगळागौरीपुढे |
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६५४ |
गुलाबाचे फुल गणपतीला
वाहिले |
| ------- रावांचे
जीवनासाठी पुणे शहर पाहिले |
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६५५ |
सांबाच्या पिंडीला बेल
वाहिला हिरवागार |
| आणि ------- रावांच्या
जीवासाठी केला संसार |
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६५६ |
मोत्याचे पेले पाहून
चंद्र सुर्य हसे |
| जमलेल्या मंडळीत
------- राव खासे |
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६५७ |
काळया चंद्रकलेवर ता-यांसारख्या
टिकल्या |
| ------- रावांच्या
मळयात खूप तूरी पिकल्या |
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६५८ |
सागवान पेटीला सोन्याची
चूक |
| ------- रावांच्या
हातात कायदयाचे बूक |
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६५९ |
लहानश्या भिंती चित्रे
काढू किती |
| सासुबाईच्या पोटी
-------- राव मोती |