|
१२१ |
भाऊ माझा दादा, बहिण माझी ताई |
| ----- रावांसाठी सोडली प्रेमाची आई |
|
१२२ |
असंख्य तारे नभात पाहावेत निरखून |
|
----- रावांसारखे पती वडिलांनी दिले
पारखून |
|
१२३ |
काचेच्या पेल्यात सुखदुःखाचं पेय |
| ----- रावांना किर्ती मिळावी हेच माझे
ध्येय |
|
१२४ |
द्वारकेत क्रुष्ण, अयोध्येत राम |
|
----- रावांचे चरण हेच माझे चारही धाम |
|
१२५ |
कुबेराच्या भांडारात हिरे-माणकांच्या राशी |
| ----- रावांचे नाव हिच माझी अयोध्या काशी |
|
१२६ |
नाशिक केले, पंढरपूर केले, करायची राहिली काशी |
|
----- रावांचे नाव घेते ----- ची भाची |
|
१२७ |
काचेच्या अलमारीत गणपतीची मुर्ती |
| ----- राव बसले पुजेला मी ओवळते आरती |
|
१२८ |
सर्व दागिन्यात श्रेष्ठ काळे मणी |
| ----- राव आहेत माझ्या कुंकवाचे धनी |
|
१२९ |
हाताने करावे काम मुखाने म्हणावे राम |
| ----- रावांचे चरण हेच माझे चारही धाम |
|
१३० |
सासु-सासरे ज्ञानी,
आई-वडिल सदगुणी |
| ----- रावांच्या नावाने
गळ्यात घातले काळे मणी |
|
१३१ |
अडचणीच्या वेळी कामात
पडते साठवण |
| ----- राव इथे नसले कि
त्यांची येते आठवण |
|
१३२ |
२०० शे ची दमनी, ३०० चा
बिछाना |
| ----- राव बसले धुरीवर
चंद्र सुर्य दिसेना |
|
१३३ |
काचेची बांगडी केसापेक्षा
बारीक |
| ----- रावांचे नाव घेते
आज आहे ----- तारीख |
|
१३४ |
आता वाजले सहा |
| ----- राव म्हणतात
माझ्याकडे एकदा तरी पहा |
|
१३५ |
चांदीची कुयरी हळदी कुंकवाने भरावी |
| ----- रावांची सेवा जन्मोजन्मी घडावी |
|
१३६ |
चहा केला नेऊन दिला, दुधाने भरले कप |
| ----- रावांसाठी केले अठरा वर्षे तप |
|
१३७ |
पोथी, पुराणे वाचून बोध होतो मनाला |
| ----- रावांचे नाव घेते वटसावित्रीच्या
सणाला |
|
१३८ |
चिकन सुपारी फोडावी दाताने |
| ----- रावांचे काकण सोडावे उजव्या हाताने |
|
१३९ |
रिमझीम पाऊस पडे मोत्याचा सुटला वारा |
| ----- रावांच्या घरी येताना डोळयाला
लागतात धारा |
|
१४० |
सोन्याच्या बेसरीत पाचूचा खडा |
| ----- राव अन माझा जन्माचा जोडा |