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९४६ |
शंकरासारखा पिता अन पार्वती सारखी माता |
| -------- राणी मिळाली स्वर्ग आला हाता |
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९४७ |
जन्म दिला मातेने पालन केले पित्याने |
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-------- च्या गळयात मंगळसुत्र
बांधतो प्रेमाने |
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९४८ |
वेरुळची शिल्पे आहेत अप्रतिम सुंदर |
| -------- आहे माझी सर्वापेक्षा सुंदर |
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९४९ |
पंच पक्वांनाच्या ताटात वाढले लाडु पेढे |
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-------- चे नाव घेताना कशाला हवे आढे वेढे |
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९५० |
उगवला सुर्य मावळली रजनी |
| -------- चे नाव सदैव माझ्य़ा मनी |
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९५१ |
क्रुष्णाच्या बासरीचा राधेला लागला ध्यास |
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-------- देतो मी लाडवाचा घास |
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९५२ |
सनई आणि चौघडा वाजतो सप्त सुरात |
| -------- चे नाव घेतो -------- च्या घरात |
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९५३ |
श्रावण महिन्यात दिसते इंद्रधनुची रंगत
न्यारी |
| -------- च्या साथीसाठी केली लग्नाची
तयारी |
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९५४ |
मोहमाया स्नेहाची जाळी पसरली घनदाट |
| -------- बरोबर बांधली जीवनगाठ |
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९५५ |
मोह नाही माया नाही, नाही मत्सर हेवा |
| -------- चे नाव घेतो नीट लक्ष ठेवा |
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९५६ |
आई-वडील, भाऊ बहिणी, जणू गोकुळासारखे घर |
| -------- च्या आगमनाने पडली त्या सुखात भर |
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९५७ |
चांदीच्या ताटात रुपया वाजतो खणखण |
| -------- चे नाव घेऊन सोडतो आता कंकण |
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९५८ |
पुढे जाते वासरु, मागुन चालली गाय |
| -------- ला आवडते नेहमी दुधावरची साय |
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९५९ |
संसाराच्या सागरात पती पत्नी नावाडी |
| -------- मुळे लागली मला संसाराची गोडी |
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९६० |
देवाजवळ करतो मी दत्ताची आरती |
| -------- माझ्या जीवनाची सारथी |
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९६१ |
स्वतंत्र भारताची तिरंगी ध्वजाने वाढविली
शान |
| -------- चे नाव घेतो ठेऊन सर्वांचा मान |
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९६२ |
काश्मीरच्या नंदनवनात फुलतो निशीगंध |
| -------- सोबत जीवनात मला आहे आनंद |
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९६३ |
नवग्रह मंडळात शनीचं आहे वर्चस्व |
| -------- आहे माझे जीवन-सर्वस्व |
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९६४ |
भारत देश स्वतंत्र झाला, इंग्रज गेले पळून |
| -------- चे नाव घेतो जरा पहा मागे वळून |
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९६५ |
बहरली फुलांनी निशिगंधाची पाती |
| -------- चे नाव घेतो लग्नाच्या राती |