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९०६ |
ता-यांचं लुकलुकणं
चंद्राला आवडलं, |
| -------- मी जीवनसाथी
म्हणून निवडलं |
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९०७ |
विज्ञान युगात
माणुस करतोय निसर्गावर मात |
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-------- चा अर्धांगिनी म्हणुन घेतला मी
माझ्या हातात हात |
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९०८ |
चंद्र आहे चांदणीचा सांगाती |
| -------- आहे माझी जीवनसाथी |
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९०९ |
चौकोनी आरशाला वाटोळी फ़्रेम |
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माझ्या लाडक्या -------- वर माझे खरे प्रेम |
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९१० |
निसर्गाला नाही आदी नाही अंत |
| ------- आहे माझ्या मनपसंत |
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९११ |
चित्रकाराने केली फ़लकावर रंगाची उधळण |
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-------- चे नाव भासे जणू माणिक मोत्यांची उधळण |
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९१२ |
कपाळाचे कुंकु जशी चंद्राची कोर |
| -------- च्या मदतीवर माझा सगळा जोर |
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९१३ |
पुणं तिथं का उणं म्हणतात सारी जणं |
| -------- न केलं सार्थ माझं जिणं |
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९१४ |
कळी हसेल फुल उमलेल, मोहरुन येईल सुगंध |
| -------- च्या सोबतीत गवसेल जीवनाचा आनंद |
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९१५ |
खडी साखरेचा खडा खावा तेव्हा गोड |
| -------- च्या रुपात नाही कुठेच खोड |
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९१६ |
श्रीमंत माणसांना असते पैशाची धुंदी |
| -------- चे नाव घेण्याची ही पहिलीच संधी |
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९१७ |
रसाळ पाहिजे वाणी स्त्री पाहिजे निर्मला |
| -------- च्या नावाचा लागला मला जिव्हाळा |
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९१८ |
हि-याचा कंठा मोत्याचा घाट |
| -------- च्या हौशीसाठी केला सगळा थाट |
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९१९ |
गुलाबाचे फ़ुल गणपतीला वाहीले |
| -------- च्या साठी -------- गाव पाहीले |
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९२० |
आंबे वनात कोकीळा गाते गोड |
| -------- आहे माझ्या तळहाताचा फ़ोड |
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९२१ |
लाखात दिसते देखणी, चेहरा सदा हसरा |
| -------- च्या रुपापुढे अप्सरेचा काय तोरा |
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९२२ |
मुखी असावे प्रेम हातामध्ये दया |
| -------- सोबत जडली माझी माया |
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९२३ |
वरमथळा खाली बातमी, वर्तमान पत्री रीती |
| -------- चे नाव घेतो अजोड आमची प्रीती |
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९२४ |
रखरखत्या वैशाखात प्रेमाचा धुंद वारा |
| जीवनाचा खेळ समजला -------- मुळे सारा |
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९२५ |
इंद्राची इंद्रायणी, दुष्यंताची शकुंतला |
| -------- नाव ठेवले माझ्य़ा प्रिय पत्नीला |